वन्दे मातरम

A-Revolutionary-राजेंद्रनाथ लाहिड़ी

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16 दिसंबर,1927 की रात को लाहिड़ी गोंडा जेल में भागवत गीता का पाठ कर रहे थे। अचानक उन्होंने जेलर को आते देखा। जेलर साहब इस समय, लाहिड़ी ने कहा। जेलर ने उन्हें भारी मन से कहा आपको कल फांसी दी जाएगी।

क्यों? कल तो 17 दिसंबर है। मेरी फांसी की तारीख तो 19 दिसंबर है। दो दिन पहले क्यों? लाहिड़ी ने हंसते हुए कहा, मुझे लग रहा है कि ब्रिटिश सरकार मुझसे खतरा महसूस कर रही है। आप, जाओ, मैं कल तैयार हो जाऊंगा। मैं जेल से नहीं भागूंगा।

सुबह के समय वे गीता का पाठ करने के साथ ही दैनिक क्रियाएं समाप्त कर चुके थे। ठीक उसी समय मजिस्ट्रेट और जेल के अधिकारी वहां पहुंचे। पूजा समाप्त करने के बाद उन्होंने मजिस्ट्रेट से पूछा, उम्मीद करता हूं कि मैंने देर नहीं की, मैं कुछ और समय लूंगा।

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