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गतांक से आगे पढ़िए..…..
कुछ इतिहासकारों का मत है कि शान्तिदास अधिकारी नामक वैष्णव संत, जो वैष्णव धर्म के प्रचार हेतु उस समय मणिपुर आए हुए थे, ने पामहैबा के राजवंशी होने के तथ्य की पुष्टि की थी। इन्होंने अपने शासन-काल में कई बार म्यांमार पर आक्रमण किए और विजय प्राप्त की।……………….

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चैथरोल कुमबावा नामक हस्तलिखित इतिहास-ग्रंथ में महाराजा गरीबनवाज के सन 1727 ई० में
उपनयन-संस्कार का उल्लेख और गुरु गोपालदास नामक किसी वैष्णव साधु के द्वारा उन्हें दीक्षा देने का वर्णन है।

गुरु गोपालदास किस मत के अनुयायी थे। इस संबंध में विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है।
भाग्यचन्द्र-चरित नामक ग्रंथ में रामदास वैरागी द्वारा उन्हें दीक्षा देने का उल्लेख है। गरीबनवाज के द्वारा रामानन्दी संप्रदाय से पूर्व गौड़ीय वैष्णव-संप्रदाय में दीक्षा लेने की बात भी कुछ इतिहासकार कहते हैं।

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