king-pinglak
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पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-12 में आपने पढ़ा कि ……..

जब करटक ने भी हामी भर दी, दमनक उसे प्रणाम करके King-Pinglak की ओर चला। दमनक को अपनी ओर आते देख कर King-Pinglak ने द्वारपाल को आदेश दिया, मेरे पुराने मंत्री के पुत्र दमनक आ रहे हैं। इनके आने पर किसी तरह की रोक-टोक नहीं होनी चाहिए, इसलिए अपनी बेंत की छड़ी पीछे हटा लो। उन्हें दूसरी पंक्ति में बैठना होगा।

अब इससे आगे पढ़िए, भाग-13 …………

द्वारपाल ने सिर झुका कर King-Pinglak से कहा, जैसी महाराज की आज्ञा।

दमनक ने प्रवेश करने के बाद King-Pinglak को झुक कर प्रणाम किया। King-Pinglak ने भी उसके सिर पर अपने पैने और मजबूत नखों वाले वाले दाहिने हाथ को रख कर आशीष दिया। जब दमनक बताए हुए स्थान पर बैठ गया तो King-Pinglak ने आदर सहित कहा, कुशल मंगल तो है? बहुत दिनों बाद दिखाई पड़े। कैसे आना हुआ?

दमनक बोला, महाराज अपनी ओर से तो कभी याद किया नहीं। मुझे ही कुछ सूझा तो अर्ज करने चला आया। सोचा, King-Pinglak के यहां तो बड़े, छोटे और मझोले-सभी की जरूरत रहती है। हो सकता है मैं भी किसी काम आ जाऊं।

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