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और जहां बैलट पेपर से मतदान हुआ वहां भाजपा की तरह बाकी दलों के जीते प्रत्याशियों का भी प्रतिशत कम रहा। इस सच्चाई को बड़ी ही चतुराई से छिपा दिया गया। और ऐसा माहौल क्रिएट किया गया कि बैलट पेपर से हुए मतदान में भाजपा के मुकाबले अन्य दलों का प्रदर्शन बेहतर रहा।
इस तरह यह साबित किया गया कि ईवीएम ने भाजपा को जबरदस्त लाभ पहुंचाया। ईवीएम विरोधी और षडयन्त्र भरे दुष्प्रचार की पोल इस तथ्य से भी खुलती है कि बैलट पेपर से हुए मतदान वाले पालिका और पंचायत चुनाव में जहां भाजपा के जमानत जब्त होने वाले प्रत्याशियों का प्रतिशत 38 है। तो उसके विपरीत सपा, बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों का प्रतिशत 52, 73 और 87 क्रमश: है।
क्या 52, 73 और 87 के अंक इन पार्टियों के लिए 38 से छोटे हो गये हैं। अथवा ये आरक्षण की गणित है। जानबूझकर इसका उल्लेख न तो अखिलेश यादव ने किया और ना ही मायावती अथवा उनके साथियों ने।
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