इस समय तो गिरोहबन्द संगठन की तरह प्राइवेट अस्पताल, नर्सिंग होम और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं। इन्हें नेताओं का भी संरक्षण प्राप्त है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। नहीं लगता कि License Cancellation का आदेश ज्यादा देर तक ठहर पायेगा।
दिल्ली सरकार को उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में केविएट दाखिल कर देनी चाहिए। वरना जैसा कि मैक्स अस्पताल कह रहा है कि उसे सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। इसी बिना पर न्यायालय से स्टे ले आयेगा।
अस्पताल पर जुड़वा बच्चों के इलाज में लापरवाही बरतने एवं एक जिन्दा नवजात को मरा घोषित करने का आरोप है। मरा घोषित करने के एक सप्ताह तक वह नवजात जिन्दा रहा उसके बाद दूसरे अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
Back to top button