डॉक्टरों को बचाने के लिए ही तो आईएमए बनाया है, इसमें हस्तक्षेप करने वाले आप कौन?
ये सिलसिला लम्बा है। कहॉं तक बतायें। चिकित्सा के क्षेत्र में दिनप्रतिदिन जितनी भी मशीनों का ईजाद हो रहा है, उतना ही मरीजों को लूटने का व्यापार बढ़ता जा रहा है।
अब तो यदि रात में आप अस्पताल पहुंचे। और आप ये कह भी रहे हैं कि दर्द उठा, इसके बाद उल्टी हुई। बेचैनी होने लगी फिर उल्टी में खट्टा-खट्टा पित्त निकला। शाम से डकारें आ रहीं थी।
आपको तुरन्त तीन-चार इंजैक्शन ठोंक दिये जायेंगे। ब्लड टेस्ट कर लिया जायेगा। अब तो हैण्डहैल्ड मशीन ईसीजी की भी आ गई है। उसका भी इस्तेमाल कर लिया जायेगा। यानी जितनी भी मशीनें होंगी, उन सबका प्रयोग करके, उसके बाद दवाइयॉं लिखी जायेंगी अलग से।
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