प्राइवेट अस्पताल, डॉक्टर्स, नर्सिंग होम्स इतने बड़े-बड़े गैर मानवीय कृृत्य करते हैं, उनमें से कितनों के खिलाफ आजतक आईएमए ने कार्रवाई की। जरा उसका खुलासा करे। जितना काला धन इन नर्सिंग होम और प्राइवेट अस्पताल चलाने वाले लोगों के पास है, उतना किसी के पास नहीं है।
ये अस्पताल नोट बनाने की मशीन बने हुए हैं। ये भगवान के चोले में शैतानों वाला कृृत्य कर रहे हैं। और जब इनके कूकृृत्यों के खिलाफ कोई कार्रवाई की बात होती है। आजतक तो ऐसी कार्रवाई कभी देखने सुनने को मिली नहीं। पहली बार दिखाई दी, तो आईएमए बीच में घुस गया। क्या एसोसियेशन का काम गैंग बनाकर अपनी बिरादरी के डॉक्टरों को शेल्टर देना ही है।
जिस मानव सेवा और डाक्टरी-धर्म की कसम खाकर ये डॉक्टरी का लाइसेंस पाते हैं। वो लाइसेंस क्या केवल खून चूसने और जायज-नाजायज किसी भी रूप से दौलत इकठ्ठी करने के लिए ही है। इन्टर्न भी मरीज से ऐसे बात करता है, मानो सही में उसका अन्नदाता और भगवान वही है।
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