नेतन्याहू के हारते ही ईरान में तबाही, इजरायल का क्या है सीक्रेट प्लान?
दुनिया में इस वक्त बहुत सारी आश्चर्यजनक चीजें हो रही हैं। जैसे कि ब्राजील में चौथी बार लूला डिसिल्वा राष्ट्रपति का चुनाव जीत जाते हैं। आज 27 अक्टूबर है। चुनाव इजराइल में भी चल रहा है और कहा जा रहा है कि नेतन्याहू का इस बार वापसी करना मुश्किल है। तीसरी तरफ़ इस ईरान के ऊपर एक बहुत बड़ी स्ट्राइक करने का प्लान किया जा रहा हैरा। दावा किया जा रहा है कि इस बार प्लान ऐसा है कि इस बार रिजीम चेंज करवा कर रहेंगे। वहीं अमेरिका में मिड टर्म के चुनाव होने वाले हैं। तो सारी चीजें जिस तरीके से दुनिया में चल रही हैं उनके बीच ये अपने आप में एक बहुत बड़ी खबर बन जाती है कि क्या जो काम पहले अमेरिका और इजराइल मिलकर करना चाहते थे नहीं कर पाए थे अब जब ईरान की ताकत का अंदाजा हो गया है अब कर पाएंगे।
इजराइल कोई बड़ा हमला कर करेगा
ईरान की जो सैन्य क्षमता है पहले से कमजोर हुई है। भले ही ईरान दावा कर रहा हो कि नहीं हम अभी भी लड़ने के लिए तैयार हैं। लेकिन ईरान की अंदरूनी स्थिति बहुत कमजोर है। लोगों को बहुत दिक्कतें हो रही हैं। चाहे महंगाई की बातें हो, जरूरत की जो चीजें हैं, वह भी मिलने में दिक्कत हो रही है। अब ऐसे में अगर कोई बड़ा हमला होता है तो सरकार के लिए यह बहुत बड़ी चिंता का विषय बन सकता है। ऐसे में ही कहीं ना कहीं रिजीम चेंज करने की बात जो की जा रही है इजराइल के द्वारा वो संभव हो सकती है। लेकिन बड़ी बात यह है कि जनता को यह बात पहुंचाई कैसे जाए। कहीं ऐसा ना हो कि इजराइल का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ईरान की जनता को प्रेजेंट सरकार के साथ में खड़ा कर दे। यह भी एक घटना हो सकती है। इजराइल इस प्रकार की योजना पर काम कर रहा होगा कि जब हम बड़ा हमला करें तो बड़े हमले के साथ-साथ प्रेजेंट गवर्नमेंट के जो विरोधी गुट है उनको भी कह दे पूरा समर्थन दे ताकि वो भी एक बड़ी मुखर आवाज उठाएं कि अगर ये प्रेजेंट सरकार हट जाए तो ईरान की जो बदहाल अवस्था है चाहे वो अर्थव्यवस्था हो या अन्य और तरीके से उसमें बदलाव लाया जा सकता है।
रिपोर्ट्स दावा करती है कि इराकी मलेशिया ने 400 लोगों को मारा था। ट्रंप ने कहा था कि मदद रास्ते में मदद आ रही है। 15 दिन बाद वो मदद पहुंची थी तब तक हजारों लोग मारे जा चुके थे ईरान में। ईरान की जो प्रेजेंट गवर्नमेंट है उसका उतना लाओ लश्कर नहीं रहा और ऑलरेडी जब बाहरी हमला होगा तो अंदरूनी आवाजों को रोक पाना ईरान के लिए दो मोर्चों पर दो फ्रंट वॉर हो जाएगा ना। इन दोनों से लड़ने के लिए ईरान की क्षमता आज नहीं है। उस समय थी लेकिन अब इतने लंबे समय से वोट चलते हुए ईरान की कैपेबिलिटी में कैपेसिटी में काफी कमजोरी आई है। तो अब देखना ये होगा कि इजराइल और अमेरिका उन प्रेजेंट गवर्नमेंट के जो विरोधी लोग हैं उनको कैसे साधते हैं। अगर ईरान की जनता को ये लगा कि ये हमारे देश को खत्म करने की बात है। तो हो सकता है दाव उल्टा पड़ जाए और अगर सरकार ने यानी कि जनता ने यह मान लिया कि सरकार को बदलने की बात है तो हो सकता है कि पॉसिबिलिटीज बन जाए।



