वन्दे मातरम
Shrimanta Shankardev-महान विभूति भाग-2
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Shankardev-महान विभूति के मुख्य भाग में आपने पढ़ा कि…….
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Shankardev की रचनाओं में बरगीतों का महत्वपूर्ण स्थान है। ये गीत असमिया काव्य की बहुमूल्य देन है।
अब इसके आगे पढ़िए कि……….

Shankardev द्वारा रचित इन गीतों की संख्या 240 बतलाई जाती है। इन गीतों में से अधिकांश जल गए। इस समय कुल चौंतीस गीत ही रह गए हैं। इनमें बहिर्जगत का त्रास एवं आत्मोद्घार की करुणा सर्वत्र है।
तोटय और देव भटिमा में भी विनय ही प्रमुख है। नाट्य गीतों में संगीत है और तत्कालीन असमिय नृत्यों का भी समावेश किया गया है। इससे यह नाटक सामान्य जन के लिए बड़े प्रभावपूर्व और मनोरंजक बन गए हैं।
इन नाटकों की विशेषता यह भी है कि इनके कुछ गीत ब्रजावली में लिखे गए हैं। तत्कालीन असम में ब्रजावली का प्रभाव स्पष्ट है। इस प्रकार के छोटे-छोटे नाटक असमिया भाषा में अंकीया भाओना कहलाते हैं।
Shrimanta Shankardev को असम में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव नाम से पुकारा जाता है। वस्तुत: Shrimanta Shankardev महापुरुष थे। जिन्होंने धारा के विरुद्घ नाव चलाई थी। असम में घोर वामाचार और बलि के नाम पर हिंसा प्रचलित थी। मांस, मदिरा और मैथुन का पूजा के नाम पर प्रयोग किया जा रहा था।
…………..जारी
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