पंचतंत्र
PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-1
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विद्या के लिए गुरू की सेवा करनी पड़ती है, जो जब तब काफी भारी पड़ती है। योग्य छात्र को अपनी योग्यता की धाक जमाने के लिए गुरु के पांव दबाने से कर चंपी करने तक के काम करने पड़ते हैं।
दक्षिणा में गुरु ने कोई ऐसी वैसी चीज मांग दी तो लेने देने पड़ जाते हैं।
ब्याज उगाही का काम है तो अच्छा पर एक बार पैसा दूसरे के पास गया तो डर यह भी रहता है कि कही गांठ का पैसा भी न निकल जाए।
इससे आगे, अगले भाग—2 में पढ़ें…..
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