Panchatantra-king-pinglak
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पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-5 में आपने पढ़ा कि —

मैं थोड़ी देर के लिए तुम्हारी बात मान भी लेता हूं। पर क्या यह सच नहीं है कि जो लोग ठान लेते हैं और इसी पर जुट जाते हैं वे सांपों, हाथियों और शेरों को भी वश में कर लेते हैं? तो क्या ऐसा असम्भव है? बुद्घिमान व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता है।……

अब इससे आगे पढ़िए-भाग-6

विद्वान मनुष्य को ख्याति तभी मिलती है जब उसे राजा (King) का आश्रय प्राप्त हो जाता है। इसके अभाव में वह अपने गांव के जोगी की तरह जोगड़ा बना रहता है। यदि सुगंध को दूर तक ले जाने वाला मलय पवन न हो तो क्या चंदन को कोई पूछेगा?

यहां तो एकहि साधे सब सधे, वाला मामला है। राजा (King) को प्रसन्न कर लिया तो छत्र, चंवर, सुंदर घोड़े और-मतवाले हाथी सब कुछ अपने आप ही मिल जाते हैं।

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