पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-4 में आपने पढ़ा कि —
अप्रधान: प्रधान: स्यात् सेवते यदि पार्थिवम? और जिनकी तूती बोलती रहती है उन्हें भी जब अपने पद से हटा दिया जाता है तो बैठे-बैठे मक्खियां मारते दिखाई देते हैं। उन्हें कोई घास तक नहीं डालता।
अब इससे आगे पढ़िए, भाग-5 ……..
फिर राजा (King) के पास जो लोग होते हैं वह तो उन्हीं के कहने में रहता है। चाहे वे घोंचू और गावदी ही क्यों न हों। अरे यार, राजाओं (King), युवतियों और लताओं के स्वभाव में एक विचित्र समानता है।
जो भी पास हुआ वे अक्सर उसी से चिपट जाते हैं। असल बात तो यह है कि आदमी को यह पता होना चाहिए कि राजा (King) क्या चाहता है और क्या नहीं। कोई इस बात को समझ कर काम करे तो मौका मिलने पर वह राजा (King) को पटा ही लेगा।
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