पंचतंत्र

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-11

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-10 में आपने पढ़ा कि ……..

पिता के संपर्क में रह कर जो कुछ मैंने सीखा है उसका एक भेद यही है कि जो बिना अवसर के ही कोई बात कह बैठता है वह यदि बृहस्पति की तरह परम विद्वान हो तो भी उसका अपमान होकर ही रहता है।

अब इससे आगे पढ़िए, भाग-11 …………

करटक को दमनक की योग्यता में विश्वास तो था पर वह अपने ज्ञान और अनुभव से इस नतीजे पर
पहुंचा हुआ था कि राजा पहाड़ की तरह होता है। जैसे पहाड़,(Snake) सांप-बिच्छू आदि प्राणियों से भरे होते हैं, उसी तरह राजा के दरबार में मौका पाकर डंसने वालों की कमी नहीं होती। पहाड़ ऊंचे-नीचे होते हैं और राजा तक पहुंचने में भी बहुत से उतार चढ़ाव देखने पड़ते हैं।

पहाड़ पत्थर के तो होते ही हैं, राजा भी बहुत कठोर होता है। पहाड़ों में चोर डाकू भी दुबके रहते हैं और राजा के आस-पास भी भितरघात करने वालों की कमी नहीं होती। फिर पहाड़ इतने ऊंचे होते हैं कि उन पर चढ़ पाना बहुत कठिन होता है। इन सभी करणों से राजाश्रय प्राप्त करने से रूतबा जितना ही बढ़े, पर है यह बहुत कठिन और जोखिम भरा काम।

करटक को भी अब अपनी योग्यता दिखाने का अवसर मिल ही गया। उसने आगे कहा, राजाओं और पहाड़ों में अनेक बातों में समानता नहीं होती, राजा तो कई बातों में सांप (Snake) जैसा भी होता है। जैसे सांप (Snake) के ऊपर केंचुल होती है उसी तरह राजा भी कवचधारी होता है।

सांप (Snake) टेढ़ी चाल चलता है तो राजा की भी चाल बहुत टेढ़ी होती है। सांप (Snake) की ही तरह राजा क्रूर स्वभाव का होता है। सांप (Snake) और राजा दोनों को मंत्र से ही साधा जा सकता है, शक्ति से नहीं। सांप (Snake) तो दो जिह्वा वाला होता ही है, राजा की भी दो जबान होती है।

सांप (Snake) दूसरों की बनाई हुई मांद में घुस जाता है और इस अर्थ में परछिद्रान्वेषी कहा जाएगा और राजा दूसरों के दोष और दुर्बलता की टोह में रहता है और इस दृष्टि से वह भी परछिद्रान्वेषी ही होता है। जिस व्यक्ति से राजा का तनिक भी अपकार हो गया वह उसके क्रोध की आग में पड़ कर पतंगों की तरह भस्म हो जाता है।

राजा का पद उसी तरह दुर्लभ है जैसे ब्रह्मतेज की प्राप्ति। ब्रह्मत्व की साधना और राजसत्ता की प्रितस्पर्धा में तनिक भी चूक होने पर सब कुछ गड़बड़ हो जाता है। और इनमें एक और समानता होती है कि ये दोनो ही तनिक भी उपेक्षा सहन नहीं कर पाते।

इसके आगे भाग—12 में पढ़ियेग़ा……….

Related Articles

Back to top button

mahjong ways

slot777