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Raja

ढोल की पोल पार्ट-1

गतांक से आगे................. ‘तो यह समझिए कि केवल आवाज से ही किसी की धौंस में नहीं आ जाना चाहिए। अभी आप को न तो घबराना चाहिए न डरना।’ शेर ने कहा, ‘‘अकेले मेरी बात होती तब तो कोई चिंता ही नहीं थी। तुम तो देख ही रहे हो, मेरे सारे…

PanchTantra की कहानी-King-Pinglak भाग-13

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-12 में आपने पढ़ा कि …….. जब करटक ने भी हामी भर दी, दमनक उसे प्रणाम करके King-Pinglak की ओर चला। दमनक को अपनी ओर आते देख कर King-Pinglak ने द्वारपाल को आदेश दिया, मेरे पुराने मंत्री के पुत्र दमनक आ रहे हैं।…

PanchTantra-कान भरने की कला भाग-17

पिछले अंक के भाग-16 में आपने पढ़ा कि…………… इसे उसने पांच खंडों में तैयार किया था। उसके मन में कहानियां लिखते समय मकड़ी के तार का रूपक रहा हो या कठपुतली के खेल में सूत्रधार का उदाहरण, उसने इस किताब का नाम रखा पंचतंत्र। इससे आगे भाग-17 में…

PanchTantra-कान भरने की कला भाग-16

पिछले अंक के भाग-15 में आपने पढ़ा कि…………… उसके मंत्रियों के अचरज का भी ठिकाना नहीं था। राजा अपने लड़कों को उस ब्राह्मण को सौंप कर इस ओर से पूरी तरह निश्चित हो गया। इससे आगे भाग-16 में पढ़िए………कि.. न सही छह महीने साल दो साल ही सही, वह पंडित…

PanchTantra-कान भरने की कला भाग-15

पिछले अंक के भाग-14 में आपने पढ़ा कि…………… उन्हें यह पता ही नहीं चल रहा था कि विष्णुशर्मा कहानियों के मधु में ज्ञान नामक गुडुची का सत भी मिलाते जा रहे हैं जिसे अलग से चखने पर उन्हें पहले उबकाई आने लगती थी। इससे आगे भाग-15 में पढ़िए………कि..…

PanchTantra-कान भरने की कला भाग-14

पिछले अंक के भाग-13 में आपने पढ़ा कि…………… उस मंत्री को विष्णुशर्मा नाम के उस पंडित का पता था जो सभी शास्त्रों का जानकार था और छात्रों के बीच बहुत लोकप्रिय था। सुमित ने सुझाव दिया कि राजा ( King ) अपने बच्चों को उसी को सौंप दे। वह गधों को…

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PanchTantra-कान भरने की कला भाग-13

पिछले अंक के भाग-12 में आपने पढ़ा कि…………… King ने खांस कर गला साफ करते हुए कहा, यहां मेरे ही दान पर पलने वाले पांच सौ पंडित बैठे हैं। पंडितों ने King के इस कटु सत्य का बुरा नहीं माना। King ने आगे कुछ नरम होकर कहा, आप लोग कोई ऐसा जतन करें…

PanchTantra-कान भरने की कला भाग-12

पिछले अंक के भाग-11 में आपने पढ़ा कि…………… वह कितना भी सुंदर हो, कितना भी कमाऊ निकले, कितना भी गुणी हो जाए, पर लड़का ज्ञानी नहीं हुआ तो उसका होना न होना बराबर है। इससे आगे भाग-12 में पढ़िए………कि….. सभासद कान खोले और ध्यान लगाए सुनते रहे।…

PanchTantra-कान भरने की कला भाग-11

पिछले अंक के भाग-10 में आपने पढ़ा कि…………… सचिवों को यह बात मालूम थी। राजकुमार जैसे थे वैसा बनाने में उनमें से कुछ का सहयोग भी था। वे चाहते थे कि राजा उनमें से जो भी बने पर राजा बनने के बाद वह सारा काम उनके ही ऊपर छोड़ कर वह नाच-तमाशा…

PanchTantra-कान भरने की कला भाग-10

पिछले अंक के भाग-9 में आपने पढ़ा कि…………… कहने का मतलब यह है कि लड़के लिख लोढ़ा, पढ़ पत्थर थे। उनका मन शैतानी में अधिक लगता था। वे पढऩे की जगह अपने शिक्षकों को ही पाठ पढ़ाने और बनाने लगते। गुरुजी डांटते-डपटते तो उनकी छुट्टी करा देते। ......…

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