पिछले अंक के भाग-12 में आपने पढ़ा कि……………
King ने खांस कर गला साफ करते हुए कहा, यहां मेरे ही दान पर पलने वाले पांच सौ पंडित बैठे हैं। पंडितों ने King के इस कटु सत्य का बुरा नहीं माना। King ने आगे कुछ नरम होकर कहा, आप लोग कोई ऐसा जतन करें जिससे मेरे नालायक बच्चे कुछ पढ़ लिख जाएं।
इससे आगे भाग-13 में पढ़िए………कि…..
किसी समस्या को सुलझाने का सबसे आसान तरीका यह है कि पहले उसे असाध्य बता दिया जाए और फिर उसे चुटकी बजा कर सुलझा दिया जाए। इससे समस्या-समस्या जैसी टेढ़ी भी बनी रहती है और टेढ़ी अंगुली से जो कुछ निकाला जाता है वह भी निकल आता है।
उन सभासदों में सभी को नहीं तो कम से कम एक को यह रहस्य मालूम था, इसलिए उसने कहा, महाराज बारह साल तो व्याकरण सीखने में ही लग जाते है। फिर मनु आदि स्मृतिकारों के धर्मशास्त्र, चाणक्य आदि राजविदों के अर्थशास्त्र, वात्स्यायन आदि कामशास्त्रियों के कामशास्त्र पढऩे पड़ते हैं।
इस तरह धर्म, अर्थ और काम तीनों का भरपूर ज्ञान होने के बाद ही कहीं दिमाग खुलता है। इसलिए इन्हें ये सभी ज्ञान तो प्राप्त कराने ही होंगे।
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