धार्मिक

जानिए क्यों मनाई जाती है भीष्म अष्टमी, व्रत और दान करने से मिलता है शुभ फल

द्वापर युग में महाभारत काल के दौरान कई ऐसी घटनाएं हुईं, जो व्यक्ति को हैरत में डाल देती हैं। महाभारत का ऐसा ही एक प्रसंग है धनुर्धर अर्जुन द्वारा महारथी भीष्म पितामह को बाणों की शैय्या पर लेटा देना।

बता दें कि भीष्म पिता को अपनी इच्छा के मुताबिक प्राण त्यागने का वरदान था। इसलिए कई बाणों से घायल होने के बाद भीष्म पितामह ने अपनी इच्छा से प्राणों का त्याग किया था। जिसके बाद से इस दिन को भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा।

शुभ मुहूर्त
माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरूआत 16 फरवरी 2024 को सुबह 08:54 मिनट पर हो रही है। वहीं 17 फरवरी 2024 को सुबह 08:15 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के मुताबिक 16 फरवरी 2024 को भीष्म अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।

भीष्म अष्टमी का महत्व
भीष्म पितामह की तर्पण की तिथि को भीष्म अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। बता दें कि भीष्म पितामह ने आजावीन ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा का पालन किया था। इसके साथ ही उनको अपनी इच्छानुसार मृत्यु चुनने का वरदान मांगा मिला था।

जब सूर्यदेव उत्तरायण की ओर प्रस्थान करने लगे, तब भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्याने के लिए माघ शुक्ल अष्टमी को चुना। हिंदू मान्यता के मुताबिक भीष्म अष्टमी को बेहद शुभ माना जाता है।

जानिए क्या है मान्यता
मान्यता के अनुसार, जो भी व्यक्ति भीष्म अष्टमी के दिन व्रत आदि करता है, उसको जल्द ही संतान प्राप्ति होती है। वहीं इस दिन पितरों को तर्पण और दान करने से उनकी मुक्ति होता है। साथ ही भीष्म अष्टमी के मौके पर जो जातक भीष्म पितामह के निमित्त तर्पण और जल दान करता है, उस व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

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