
एनालिसिस
साहूकारों और बैंकों की दुरभिसन्धि तो नहीं
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इन बैंको से वे ही कर्ज पाने में सफल होते हैं जो इन्हें खुश रखने की तरकीब जानते हैं, जिनकी लायजनिंग अच्छी होती है अथवा जिनकी साख नहीं बल्कि हैसियत अच्छी होती है। हैसियत अच्छी होने का मतलब है आप साम, दाम और दण्ड से सम्पन्न हों।
आपकी धमक ऐसी हो कि बैंक वाला भी आपसे डरे कि यदि उसने आपको लोन नहीं दिया तो उस मैनेजर का ट्रान्सफर हो सकता है, ऐसी स्थिति में ही वह आपको घास डालेगा। वरना, कर लीजिए जो आप करना चाहें, उसकी सेहत पर फर्क पड़ने वाला नहीं। ……………..End.
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