
एनालिसिस
साहूकारों और बैंकों की दुरभिसन्धि तो नहीं
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उन्हें शायद पता नहीं कि ये गरीब शराब के नशे में नंगे नहीं रहते हैं, ये चर्बी घटाने के लिए उपवास या अनशन नहीं करते हैं, बल्कि इस हिन्दुस्तान में ये अपने लिए तन ढ़ंकने को कपड़ा और पेट भरने को भोजन प्राप्त नहीं कर पाते इसलिए भीख मांगने मजबूरी में उतरते हैं। इनकी बुद्धि नंगी नहीं है, बल्कि इनकी तकदीर नंगी है।
रूपा सुब्रह्मण्यम देहेजिया भीख देने वाली विदेशी महिला पेरिस हिल्टन को सीख देती हैं कि उन्होंने जो नेक इरादे से दान दिया उससे कदाचित अच्छे के बजाय नुकसान हुआ, क्योंकि इससे इस परिवार की इस तरह की प्राप्ति की उम्मीदें बढ़ गईं। इसलिए वह सीख देती हैं कि कृपया ऐसे नंगे लोगों को रुपये या फिर डॉलर दान में देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
धन्य हैं दहेजिया जी, यदि आपकी बगैर दहेज शादी हुई हो तो बताइयेगा! दान देने वाले और दान लेने वाले पर चर्चा करनी हो तो मेरे ईमेल पर सूचित करियेगा रूपा सुब्रह्मण्यम देहेजिया जी। तब आपको बताऊंगा कि क्यों कोई दान देता है और दान लेकर बड़े-बड़े मठ, और धार्मिक संस्थान क्या कर रहे हैं। आपको 100 डॅालर, एक गरीब को दिये जाने पर इतनी टीस हो गई। विषय से भटक न जाऊं, इसलिए अपने मूल लेख पर वापस आता हूँ। …………….जारी
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