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PANCHA TANTRA

PanchTantra-कान भरने की कला भाग-10

पिछले अंक के भाग-9 में आपने पढ़ा कि…………… कहने का मतलब यह है कि लड़के लिख लोढ़ा, पढ़ पत्थर थे। उनका मन शैतानी में अधिक लगता था। वे पढऩे की जगह अपने शिक्षकों को ही पाठ पढ़ाने और बनाने लगते। गुरुजी डांटते-डपटते तो उनकी छुट्टी करा देते। ......…

कान भरने की कला-कहानी की कहानी पंचतन्त्र-7

पिछले अंक के भाग-6 में आपने पढ़ा कि…………… पर यह इतना समय साध्य काम था जिसकी अनुमति न तो मेरी भावी योजनाएं देती थीं। न ही प्रकाशन संस्थान दे सकता था। यह पुनर्रचना पाठकों को कितना संतोष दे पाती है यह नहीं जानता पर मेरी अपनी अतृप्ति तो बनी ही…

PanchTantra की कहानी भाग-छह

पिछले अंक में आपने पढ़ा कि…............वह भाग्यवाद को पूरी तरह खारिज तो नहीं करते पर ‘जो बिधना ने लिख दिया छठे मास के अंत, राई घंटे न तिल बढ़ै रहु रे जीव निसंक कह कर भाग्यवाद का प्रचार नहीं करते अपितु इसको मानते हुए भी कर्म और उद्यम पर बल…

PanchTantra की कहानी भाग-पांच

पिछले अंक में आपने पढ़ा कि.... सेकुलरिज्म पश्चिम के लिए नई अवधारणा हो सकती है। क्योंकि वहां धार्मिक जकड़बंदी इतनी कठोर रही है कि तनिक सी छूट को भी असह्य मान कर भारी रक्त पात होता रहा है। इस देश में इसकी एक लंबी परंपरा रही है और इसका कुछ…

PanchTantra की कहानी भाग—चार

पुराणों का प्रवेश हुआ भी तो उनका प्रभाव अल्पकालिक ही रहा। पर भारतीय कृतियों में पंचतंत्र अकेली ऐसी रचना है जिसे सही अर्थ में दुनिया का सबसे पुराना ज्ञानकोष कहा जा सकता है। भाग तीन से आगे पढ़िए ..………… इसे इसी रूप में दुनिया में जाना भी…

PanchTantra की कहानी भाग—तीन

लोगों का यह दावा कि जो कुछ इसमें है, वही अन्यत्र भी मिलेगा, जिसका वर्णन इसमें नहीं है। भाग दो से आगे पढ़िए ..………… वह कहीं और मिल ही नहीं सकता, यदिहास्ति तदन्यत्र यदिहास्ति न तत्क्वचित् या महाभारत में जिसका वर्णन नहीं है। वह भारत में है ही…

PanchTantra की कहानी भाग—दो

PanchTantra के इससे पहले के भाग—एक में आप पढ़ चुके हैं कि—घनचक्कर, रंगा सियार, बेकार पचड़े में पडऩा, मगरमच्छ के आसूं,  नकली शेर, बाघ की खाल, ढ़ोल की पोल, बगुला भगत, बंदर को उपदेश, टिटहरी का संकल्प, गधे का अलाप, गंगदत्त फिर कुएं में नहीं…

PanchTantra की कहानी भाग—एक

PanchTantra के इससे पहले के अध्याय में आप पढ़ चुके हैं कि—बूढ़े आदमी की सारी इंद्रिया उसकी आंखों में और जुबान में सिमट आई हैं। हाथों में जुंबिश भले न हो, लेकिन आंखों में दम बना हुआ है। जवानी में जो कुछ देखा, किया और सुना था, सब का सब आंखों…

PanchTantra (पंचतन्त्र) की सुन्दर कहानियॉं

PanchTantra (पंचतंत्र) के एक पात्र का मानना है कि यदि किसी को मेहमान बना कर घर में घुसने दो तो वह घर के मालिक का ही पत्ता साफ करके उस पर कब्जा जमाने की कोशिश करता है। जैसे आप ट्रेन में सफर कर रहे हों, और अपनी बर्थ पर किसी को बैठने की जगह दे…