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स्टेकिंग विधि से बढ़ेगा टमाटर का रकबा…उद्यान विभाग ने 30 हेक्टेयर में रखा पैदावार का लक्ष्य, किसानों को मिलेगा अनुदान

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जिले में टमाटर की फसल को नुकसान से बचाने के लिए उद्यान विभाग 30 हेक्टेयर में स्टेकिंग विधि से खेती कराएगा। बीज डालने के बाद टमाटर के पौधे बांस, डंडे व तार के सहारे तैयार किए जाएंगे। इससे सर्दियों में होने वाली बारिश और जलभराव का पौधों पर असर नहीं पड़ेगा। न ही मिट्टी में अधिक नमी व सड़न से पौधे नष्ट होंगे। जिला उद्यान अधिकारी धीरेंद्र सिंह ने बताया कि स्टेकिंग विधि में टमाटर के पौधे डंडे व तार के सहारे तेजी से बढ़ते हैं। 50 से 60 दिन में फसल तैयार हो जाती है। इसमें सामान्य से रंग अधिक लाल और आकार बड़ा होता है। पैदावार भी दोगुनी होती है।

इस विधि में पौधे जमीन से ऊंचे होते हैं। जड़ों में जलभराव और मिट्टी में नमी का असर नहीं पड़ता है इसलिए 100 फीसद पौधे कीट-रोग रहित तैयार होते हैं। जबकि सामान्य विधि में जलभराव और मिट्टी में सड़न से जड़ें नष्ट हो जाती हैं। स्टेकिंग विधि में खर्च अधिक आने के कारण कुछ ही किसान इसे अपनाते हैं। अब उद्यान विभाग राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों को 25 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान देगा। इससे की अधिक से अधिक किसान न के बराबर खर्च पर टमाटर की खेती कर सकें।

नवंबर में निशुल्क मिलेंगे हाईब्रिड बीज

नवंबर से टमाटर की खेती शुरू हो जाएगी। उद्यान विभाग ने कुल 460 हेक्टेयर में आच्छादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 30 हेक्टेयर स्टेकिंग विधि जबकि शेष सामान्य तरह की जाएगी। स्केटिंग विधि के लिए किसानों को नवंबर की शुरुआत में हाईब्रिड बीज निशुल्क बांटे जाएंगे। उन्नत प्रजाति के बीजों का चयन किया जा रहा है। प्रमाणित बीज में कीट रोग का असर नहीं पड़ेगा।

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