उत्तर प्रदेशपंजाब

2400 वर्ग गज जगह में अनुमानित 3 करोड़ रूपये की लागत से बन रहे श्री श्याम प्रेम धाम

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बड़ी-बड़ी डेस्टिनेशन वेडिंग आजकल चलन में हैं और उन जोड़ों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हो रही है जिन्हें किसी अच्छी सी जगह पर शादी करने की इच्छा है | लेकिन बहुत जल्द अगर आप चाहें तो इस ट्रेंड में अध्यात्मिकता को भी शामिल कर सकते हैं।

क्योंकि फरीदकोट की चहल रोड बायपास के नजदीक बन रहे श्री श्याम प्रेम धाम मंदिर में विवाह मंडप भी बन रहा है। यह मंदिर श्री खाटू श्याम सेवा समिती ( रजि) फरीदकोट के तत्वाधान में श्याम प्रेमी अमित जैन “जुगनू” की अगुवाई तले बन रहा है।

2024 के अंत तक इस मंदिर का निर्माण पुरा होने की संभावना है। श्याम कृपा हुई तो इसका विस्तार भी होगा। समिती के सेवादारों में राहुल बांसल, डॉक्टर संजीव गोयल, दीपक गोयल, अरविंद कुमार, नरेश ग्रोवर काला, मोहित नारंग भी शामिल हैं। इस निर्माणधीन मंदिर की शुरूआत 24 जून 2023 को भव्य संकीर्तन के साथ हुई थी।

अमित जैन “जुगनू” ने पत्रकारों को बताया कि पहले तो वैसे भी शादियाँ मंदिर में ही होती थी | आज कल शादियों में लोग अपनी सामर्थ्य से ज़्यादा खर्चा कर देते हैं | लेकिन अगर मंदिर में शादी करेंगे तो पैसा तो बचेगा ही, साथ ही शांति, और आध्यात्म के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि जितना पवित्र हम मंदिर को मानते हैं, उतना ही शादी का बंधन पवित्र माना जाता है। तो ज़ाहिर है मंदिर और विवाह का एक अनूठा और अटूट रिश्ता है। भारत में पारंपरिक तौर पर मंदिर में शादी वही लोग करना पसंद करते हैं जो बिना किसी दिखावे या शोर-शराबे के शादी के पवित्र बंधन में बंधना चाहते हैं।

उन्होंने बताया कि हिन्दू धर्म में शादी समारोह में मंडप बनाया जाता है। विवाह में इस मंडप का विशेष महत्व है। दूल्हा और दुल्हन इस मंडप में सात फेरे लेते हैं जिसके बाद शादी संपन्न होती है. मंडप चार स्तंभ को जोड़ कर बनाया जाता है. मान्यता है कि यह चारो स्तंभ ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ ओर संन्यास के प्रतीक होते हैं।

संस्कार विधि से निर्मित मंडप के सोलह स्तम्भ में सोलह देवताओं का निवास होता है। लड़की के माता पिता पुरोहित संग मंत्रोच्चारण कर देवताओं को विधिपूर्वक मंडप में स्थान देते हैं।

मंदिरों में प्रवेश करते ही मन को जो शांति मिलती है उसे शब्दों में बयान कर पाना काफ़ी मुश्किल है | भारत में मंदिरों को आध्यात्मिकता का केंद्र माना जाता है और अपने नए जीवन की शुरुआत करने वाले युगलों को मंदिर में विवाह करने से ईश्वर का आशीर्वाद भी मिल जाता है।

दूसरी तरफ मैरिज पैलेस वाले शादी और केटरिंग की व्यवस्था के लिए भारी भरकम फीस वसूलते हैं। एक तरफ फेरे दूसरी तरफ मांस मदिरा तथा कॉकटेल पार्टी किसी भी तरह से उचित नहीं है।

आम तौर पर दक्षिण भारत के मंदिरों और इस्कॉन के मंदिरों में विवाह मंडप के साथ शादी की पूरी व्यवस्था होती है। पंजाब के जिला फरीदकोट में श्री खाटू श्याम सेवा समिती ( रजि) की तरफ से इस तरह का पहला प्रयास किया जा रहा है।

इस निर्माणधीन मंदिर में श्री खाटू श्याम जी के अलावा श्री बाँकेबिहारी जी, श्री राम दरबार, श्री बाला जी, श्री विष्णु लक्ष्मी, श्री गणेश जी, माँ दुर्गा और शिव परिवार की मूर्तियों की स्थापना होगी। यह मंदिर कितना भव्य बन रहा है। इसकी जानकारी इसके मॉडल फोटो ग्राफ से मिलती है।

अमित जैन “जुगनू” ने आगे बताया कि इस धाम में बन रही श्री श्याम रसोई में गरीब, निसहाय, निर्धन और निराश्रितों को 24 घंटे मिनरल वाटर के साथ अच्छी गुणवत्ता वाला पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाया जायेगा। जिसका मेन्यू भी हर दिन बदलता रहेगा।

इस मंदिर में गरीबी रेखा से नीचे रह रहे श्याम प्रेमियों की कन्याओं के निशुल्क विवाह की व्यवस्था के लिए भी पुरा प्लान तैयार किया जा रहा है।

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