धोखा-धड़ी

Ramdev ने आयुर्वेद को बदनाम किया है

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लेकिन कुछ लोग थे जो इस विद्या को पकड़कर आगे बढ़ते रहे। आज भारत में ही नहीं दुनिया में आयुर्वेद की पुनर्वापसी हो गयी है। विदेश में इसका सबसे अधिक प्रसार महर्षि महेश योगी ने किया। एक तरह से आप महेश योगी को आधुनिक युग का धन्वंतरि भी कह सकते हैं।

मानव समाज के कल्याण के लिए इस विद्या के पुनर्जीवन में महर्षि महेश योगी का बहुत बड़ा योगदान है। लेकिन सरकारी तौर पर इसे बढ़ावा देने का काम शुरु हुआ 2000 के बाद जब अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत की इस परंपरागत चिकित्सा के पुनर्जीवन के प्रयास शुरु किये।

उन्होंने ही एम्स की तर्ज पर एक आयुर्वेद का संस्थान बनाने का प्रस्ताव किया था जिसका लोकार्पण आज प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। नरेन्द्र मोदी सरकार को एक श्रेय और जाता है कि उनकी सरकार ने भगवान धन्वतंरि के जन्मदिवस धनतेरस को आयुर्वेद दिवस के रूप में घोषित किया जिसका आज दूसरा साल है।

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