धोखा-धड़ी
शातिर मॉंमा भान्जे अथवा उनका सरपरस्त Punjab Bank
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हर्षद मेहता काण्ड में भी बैंकों की ही विशेष भूमिका थी। एक-दो बैंकों के एमoडीo ने तो सोसाइड भी कर लिया था। लेकिन इसके बाद इन राष्ट्रीकृत बैंकों के एमoडीo और अध्यक्षों ने नया तरीका निकाल लिया है।
सारे बैंक मिलजुलकर जनता के धन का साइफन कर रहे हैं और मजे मार रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य में ही देख लीजिए! सरकार और विपक्षी आमने-सामने तू-तू, मैं-मैं कर रहे हैं, लेकिन कोई भी ये नहीं कह रहा है कि बैंक के ये बड़े अधिकारी क्या केवल मोटी-मोटी सेलरी लेने और मौज करने के लिए जनता के खुन-पसीने की कमाई लूटने के लिए बैठे हैं।
स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक आॅफ इण्डिया, बैंक आफ बड़ौदा आदि बैंक इस मजे में हैं कि हमसे क्या हमारा धन तो पंजाब बैंक देगा। कोई इनसे पूछे कि क्या LOU को चेक करने की जिम्मेदारी आपकी नहीं थी।
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