इसके बाद विस्तारवादी चीन ने भारत पर हमला किया तथा आज भी हजारों मील भारतीय भूभाग चीन के कब्जे में है। केवल इतना ही नहीं चीन प्रतिदिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर रोज तनाव उत्पन्न कर रहा है। इसलिए भारत के लिए तिब्बत की स्वतंत्रता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तिब्बत के मुद्दे पर अमेरिका समेत अनेक युरोपीय देशों द्वारा समय समय पर तिब्बत का मुद्दा उठाने के अनेक उदाहरण हैं। अमेरिका समेत इन देशों की रुचि चीन के कब्जे से तिब्बत को स्वतंत्र करवाना नहीं है बल्कि चीन के साथ सामयिक विवाद के कारण चीन को घेरने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल करना होता है। अमेरिका भी गत छह दशकों से अपने सुविधा के अनुसार तिब्बत के मुद्दे का इस्तेमाल करता आया है।
माओ की लाल सेना ने तिब्बत को संपूर्ण रूप से कब्जा करने के बाद पहली बार अमेरिका ने चीन के खिलाफ अपने स्वार्थ साधने के लिए तिब्बत का इस्तमाल किया था। उस समय की स्थिति में अमेरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने तिब्बती युवाओं को चीन के बिरुद्ध गुरिला युद्ध लडने के लिए प्रेरित किया। सीआईए ने अमेरिका के कलराडो में चीन के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए इन देशप्रेमी तिब्बती युवाओं को बाकयदा गुरिला युद्ध लडने के लिए प्रशिक्षण भी दिया।
Back to top button