धोखा-धड़ी
Free – Free और सबकुछ फ्री के नाम पर लूट और ठगी
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किसी प्रोडक्ट पर प्राफिट आॅफ मार्जिन का कोई फार्मूला सरकार ने तय किया है अथवा जिसका का जो मन आता है, वो उतना मार्जिन रख लेता है। एमआरपी का भी कोई मतलब रह गया है कि नहीं।

वस्तुओं के दाम निर्धारित करने और उनके एमआरपी पर सरकार का कोई कन्ट्रोल है कि नहीं अथवा होना चाहिए कि नहीं? वर्तमान में पूरा व्यावसायिक बाजार, जनता/उपभोक्ता को तन मन से Free के नाम पर लूटने में लगा है।
इस देश में एक देश एक टैक्स की बात तो गले नहीं उतरी। क्योंकि जीएसटी आने के बाद भी इन्कम टैक्स तो चल ही रहा है। फिर कहॉं हुआ? वन नेशन-वन टैक्स? खैर, जीएसटी लाने के बाद भी व्यापारी टैक्स की चोरी करने से बाज नहीं आ रहे।



