panchtantra-king-10
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पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-9 में आपने पढ़ा कि ……..

दमनक समझाता जा रहा था, जो व्यक्ति राजा को आफत में पड़ा देखकर भी उसकी अनसुनी नहीं करता है और उसके हुक्म पहले की तरह बिना किसी चूक और हीला-हवाली के बजाता रहता है, वही राजा का चहेता हो सकता है।

अब इससे आगे पढ़िए, भाग-10…………

साथ ही उसे राजा (King) के शत्रुओं को अपना शत्रु, उसके मित्रों को अपना मित्र भी समझना चाहिए। राजा (King) यदि खीझ उठे और कुछ उल्टा सीधा बक जाए तो भी योग्य सेवक को कभी उलट कर जवाब नहीं देना चाहिए। चूक राजा (King) से हुई हो तो भी उसे अपनी चूक मान लेना चाहिए। राजा (King) के सामने न तो उसे ऊंची आवाज में बोलना चाहिए, न ही ठहाका मार कर हंसना चाहिए।

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