आखिरकार इन Hospital में जेनेरिक दवाईयों का ही इस्तेमाल किया जाये, ऐसा कोई प्रबन्ध भारत सरकार क्यों नहीं करती? ऐसा ना होने एवं मेडीकल ऐसोसियेशन के दवाब में सरकारें मजबूर हैं जिसके कारण हिन्दुस्तान का आम इंसान इन लुटेरों के हाथ लुट भी रहा है, और अपने परिजनों को भी खो रहा है।
इसी के चलते करीब 15 दिनों के उपचार का बिल 16 लाख रुपये के करीब पहुंचा। इतने मंहगे इलाज के बाद भी आद्या की मौत के बाद इस Hospital के खिलाफ कोई दण्डात्मक कार्रवाई नहीं होना बताता है कि सरकार इनके सामने मजबूर है। जबतक कोई राजनीतिक दल इनके खिलाफ आवाज नहीं उठायेगा, तबतक कुछ होने वाला नहीं।
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