प्रमुख सचिव, आवास, नितिन रमेश गोकर्ण ने बताया कि अनाधिकृत कालोनियों के नियमितीकरण के फलस्वरूप ऐसी कालोनियों में स्थित निवासियों को बैंको/वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करना सम्भव एवं सुविधाजनक हो सकेगा, उनके निर्माणों को तोड़े जाने का भय नहीं रहेगा और साथ ही साथ मौलिक जनसुविधाओं की उपलब्धता होने के फलस्वरूप इन कालोनियों के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

रमेश गोकर्ण ने बताया कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में विद्यमान आवासीय स्टाॅक का एक बहुत बड़ा भाग अनाधिकृत रूप से निर्मित कालोनियों के अन्तर्गत है। अनाधिकृत होने के कारण उनका ध्वस्तीकरण किया जाना व्यवहारिक न होनेके दृष्टिगत इन कालोनियों के नियमितीकरण हेतु वर्ष 2001 में गाईडलाइन्स जारी की गयी थी।

उसमें आ रही कठिनाईयों हेतु वर्ष 2003 एवं 2008 में संशोधन किया गया था, परन्तु इन कालोनियों के नियमितीकरण में कोई विशेष प्रगति नहीं हो सकी, फलस्वरूप इन कालोनियों में रहने वाले निवासियों को मूलभूत सुविधायें विशेषकर पक्की सड़कें, जल एवं मल निस्तरण, कूड़ा निस्तारण आदि की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।

बैठक में प्रमुख सचिव, नगर विकास, मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव, वित्त संजीव मित्तल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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