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वन्दे मातरम

धार्मिक क्रांति के सूत्रधार पामहैबा

मणिपुर के महाराज चराईरौङबा ने सन 1704 ई० में यज्ञोपवीत धारण किया था और 1707 ई० में भगवान विष्णु के मंदिर का निमार्ण करवाया था। उनकी दूसरी रानी निङथीन चाइबी की कोख से भगवान की कृपा से मायम्बा या पामहैबा का जन्म हुआ था। ये कालांतर में…

मौत पर मुस्कुराने वाले Revolutionary रोशन सिंह

रोशन सिंह काकोरी कांड के चौथे शहीद थे। इनका जन्म 1894 में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में हुआ था। ये मिडिल तक ही पढ़े थे, मगर इन्होंने प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की नौकरी पकड़ ली थी। ये क्रांतिकारी आंदोलन से भी जुड़े थे। इन्होंने…

A-Revolutionary-राजेंद्रनाथ लाहिड़ी

राजेंद्रनाथ लाहिड़ी एक नि:स्वार्थ क्रांतिकारी शहीद राजेंद्रनाथ लाहिड़ी का जन्म 1892 में बंगाल के पबना जिले (अब बांग्लादेश में) के मोहनपुर गांव में हुआ था।1905 में वह बनारस आए। जहां केंद्रीय हिंदू कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया। उनके पिता…

Great lord madhavadev-महान विभूति

Great Lord Madhavadev का जन्म लेटकुपुखरी में सन 1489 के जेयष्ठ मास की अमावस्या रविवार को हुआ था। महापुरुष शंकरदेव के शिष्य Great lord Madhavadev विविध प्रतिभाओं से युक्त एक विराट व्यक्तित्व के व्यक्ति थे। किसी समीक्षक ने सही टिप्पणी की है…

Shrimanta Shankardev-महान विभूति भाग-4

Shrimanta Shankardev-महान विभूति के भाग-3 में आपने पढ़ा कि..... नामधर और सत्र असम के धार्मिक सामाजिक जीवन के मूलाधार हैं। धर्म और लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने वाले संस्थान हैं। सत्रों की स्थापना गुरु द्वारा की जाती है। जहां गुरु कुछ शिष्यों के…

Shrimanta Shankardev-महान विभूति भाग-3

Shankardev-महान विभूति के भाग-2  में आपने पढ़ा कि..... भक्ति के आचार्यों एवं कबीर आदि संतों से मिलने से उनके भक्त और कवि को नई दिशा प्राप्त हुई। तीर्थाटन से लौटकर Shankardev ने नव वैष्णव धर्म का प्रचार किया। Shankardev ने बरदोवा में प्रथम…

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Shrimanta Shankardev-महान विभूति भाग-2

Shankardev-महान विभूति के मुख्य भाग में आपने पढ़ा कि....... इसे भी पढ़ें:  http://northindiastatesman.com/shrimanta-shankardev/ Shankardev  की रचनाओं में बरगीतों का महत्वपूर्ण स्थान है। ये गीत असमिया काव्य की बहुमूल्य देन है। अब इसके आगे…

Shrimanta Shankardev-महान विभूति भाग-1

Shrimanta Shankardev-पूर्वोत्तर राज्य की महान विभूति के मुख्य भाग में आपने पढ़ा कि.....Shrimanta Shankardev को विशाल नदी में तैरना भी उनको प्रिय था। किंतु बाद में दादी की प्रेरणा से वे तेरह साल की अवस्था में गुरु महेंद्र कंदली की टोल…

Shrimanta Shankardev-पूर्वोत्तर राज्य की महान विभूति

महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव (Shrimanta Shankardev) सन 1449-1568 ई० में मुसलमानों के आक्रमण से पूर्व ही असम में भक्ति भावना पनप गई थी। भारत में प्रचारित भक्ति भावना से प्रभावित होकर असम में भी भक्ति का प्रचार-प्रसार हुआ। आठवीं से बाहरवीं…

SARFAROSHI KI TAMANNA अब हमारे दिल में है

राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) भारत के महान क्रान्तिकारी व अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, अपितु उच्च कोटि के कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे जिन्होंने भारत की आजादी के लिये अपने प्राणों की आहुति दे…

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