धोखा-धड़ी

प्रबन्धतंत्र ही लुटवा रहा Banks में जमा गरीबों की जमापूंजी

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मद्रास ज्वैलर्स एण्ड डायमण्ड मर्चेंट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने कहा, ‘कंपनी घाटे को सहन नहीं कर पा रही थी और मई 2017 में ही बंद हो गई।’

एसबीआई के लेटर से पता चलता है कि कनिष्क पर लोन 2007 से ही बकाया है। समय बीतने के साथ Banks ने कनिष्क के लिए क्रेडिट लिमिट और वर्किंग कैपिटल लोन की लिमिट बढ़ा दी। यह Banks की तरफ से उसको विदेश भाग जाने का भरपूर मौका दिया गया।

जहॉंतक इस तरह के फ्राड का विश्लेषण करने से ज्ञात हो रहा है कि ऐसे सभी फ्राड में बैंक के प्रबन्धतंत्र की भूमिका संदिग्ध दिखाई दे रही है, फिर भी बैंक के बड़े अधिकारियों का बाल भी बांका नहीं हो रहा है।

जिससे ज्ञात होता है कि इन बैंकों के प्रबन्धतंत्र सहित रिजर्व बैंक भी मिला हुआ है। वरना पर्त दर पर्त खुलती जा रही हैं, लेकिन रिजर्व बैंक की जुबान है कि खुल ही नहीं रही है।

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