PNB घोटाले के बाद, इस तरह के मामलों की शिकायतों में इजाफा देखने को मिल रहा है। एक के बाद एक, कई बैंकों ने ऐसे कारोबारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करानी शुरू कर दी है जो उन्हें चूना लगाकर फरार हो गए हैं। पीएनबी, बैंक आॅफ बड़ौदा (BOB), ओरियन्टल बैंक आॅफ कामर्स (OBC) के बाद अब Bank of Maharashtra (BOM) का घोटाला यह सिद्ध् करने के लिए काफी है कि पानी नाक के उपर बह रहा है।
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दरअसल ये आपा-धापी इसकी है कि बैंकों को अब लगने लगा है कि ऐसे मामले अब ज्यादा देर तक दबाये रखने में उनके उपर भी आॅंच आ सकती है। कमोबेश ऐसा अनुमान लगाना गलत नहीं है कि ऐसे मामले लगभग सभी बैंकों में हैं। और यह एक कारोबार के रूप में चल रहा है, जिसमें बैंक प्रबन्धन की भी बराबर की हिस्सेदारी है।
आम डिपाजिटर को तो उसकी जमा एफडी पर ही लोन लेने में पसीने आ जाते हैं। एक लाख का लोन लेने में ही लेने के देने पड़ जाते हैं। जिन कारोबारियों की बेहतर साख बताकर ये घोटाले किये गये हैं, आखिरकार उनकी साख डाकुओं जैसी कैसे है?