हाल ही में एक रिपोर्ट में सामने आया है कि देश में 9 हजार 339 कर्जदार ऐसे हैं, जिन्होंने 1 लाख 11 हजार करोड़ का लोन जानबूझकर नहीं चुकाया है। इन लोगों को विलफुल डिफॉल्टर्स की श्रेणी में रखा गया है।
विलफुल डिफॉल्टर वह लोग होते हैं जो कर्ज चुकाने की स्थिति में होते हैं लेकिन निजी कारणों की वजह से वह लोन नहीं भरते। यह एक तरह से सिस्टम को चुनौती देने का मामला है। साल 2013 में विल्फुल डिफॉल्टर्स खातों की रकम 25,410 करोड़ थी, पिछले 5 सालों में इसमें 340 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन आंकड़ों को देखकर समझा जा सकता है कि आखिरकार बैंकों को कब पता लगा कि ये विलफुल डिफाल्टर हैं?
इसकी जॉंच केस टू केस होनी चाहिए और इसके लिए उस स्टाफ को जबरिया रिटायर करने के साथ ही उसकी जमा सारी रकम और उसकी प्रापर्टी को जब्त कर लेना चाहिए।
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