उत्तर प्रदेश

चिकित्सा संस्थानों में प्रिसिजन मेडिसिन आधारित इलाज की तैयारी, 26 डॉक्टरों ने खींचा खाका

लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के विभागों समेत अन्य चिकित्सा संस्थानों तक प्रिसिजन मेडिसिन आधारित चिकित्सा शुरू हो सके। इसके लिए 26 डॉक्टरों ने खाका खींचा है। दो से तीन दिन में इसका लिखित प्रारूप भी तैयार हो जायेगा। वहीं एक महीने में प्रिसिजन मेडिसिन आधारित चिकित्सा की शुरूआत केजीएमयू के अन्य विभागों में हो सकती है। यह जानकारी केजीएमयू में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के एचओडी प्रो.अविनाश अग्रवाल ने दी है।

दरअसल, प्रिसिजन मेडिसिन और इंटेंसिव केयर कॉन्फ्रेंस का आयोजन केजीएमयू में हुआ था। जिसके बाद मेडिसिन,जेनेटिक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, क्रिटिकल केयर, फार्माकोलॉजी समेत अन्य बिमारियों के विशेषज्ञों ने एक टेबल टॉक की। जिसमें प्रिसिजन मेडिसिन विधा से देश के अन्य संस्थानों और विशेषज्ञों को जोड़ने पर चर्चा हुई। बाद में इसका एक खाका तैयार हुआ है। प्रो.अविनाश अग्रवाल ने बताया कि हमारी कोशिश है कि प्रिसिजन मेडिसिन से अधिक से अधिक विशेषज्ञ जुड़ें और इसका फायदा आम लोगों को मिल सके। इसके लिए बैठक कर हमने जानकारी साझा की है। इसका लिखित प्रारूप मंगलवार तक तैयार हो जायेगा। जिसकों एक महीने के भीतर लागू कर दिया जायेगा। अन्य विभागों के मरीजों को भी इसका फायदा मिलेगा।

क्या है प्रिसिजन मेडिसिन

विशेषज्ञों की माने तों प्रिसिजन मेडिसिन चिकित्सा की वह विधा है जिसमें व्यक्ति के प्रकृति, वातावरण, व समूह के आधार पर चिकित्सा की जाती है। इस विधा से मरीजों का वर्गीकरण कर उनको सटीक इलाज देना आसान संभव होता है।

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