उत्तर प्रदेश

20 हजार वेलनेस सेंटर, 750 पीएचसी और टीबी मरीजों की रिपोर्टिंग होगी प्रभावित

11 और 12 मार्च के दिन प्रदेश के 20,000 वेलनेस सेंटर और 750 अर्बन पीएचसी पर मरीजों का विवरण ऑनलाइन नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में इन दो दिनों के भीतर टीबी मरीजों का विवरण भी ऑफलाइन ही रहेगा। यह फैसला संविदा कर्मचारियों ने ले लिया है।

प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारी आक्रोशित हैं और उनके आक्रोश का कारण केंद्र सरकार का अतिरिक्त 3% बजट है, जिसका इस्तेमाल प्रदेश सरकार नहीं कर रही है। बताया जा रहा है कि यदि इस बजट का इस्तेमाल प्रदेश सरकार करें तो वेतन विसंगति को दूर किया जा सकता है।

प्रदेश सरकार के महज इस एक कदम से बदहाल संविदा कर्मियों की आर्थिक स्थिति सुधर सकती है, लेकिन प्रदेश सरकार के अधिकारी यह बात सुनने को तैयार नहीं है इन्हीं मांगों को लेकर बीते दिनों संविदा कर्मचारियों ने 12000 पत्र मुख्यमंत्री को लिखा था।

संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री योगेश उपाध्याय ने बताया है कि साल 2016 से  भारत सरकार लगातार 3% अतिरिक्त बजट राज्यों को वेतन विसंगति दूर करने के लिए देती है। जिसका उपयोग हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार सरकार ने किया है।

उन राज्यों में वेतन नीति का निर्धारण कर संविदा कार्मिकों की वेतन विसंगति दूर की गई, लेकिन उत्तर प्रदेश में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और प्रदेश सरकार के ध्यान न देने कारण अभी तक आठ साल बाद भी उस बजट का उपयोग नही हुआ है। हम लोग लगातार सरकार से इस बजट के इस्तेमाल करने की मांग कर रहे हैं।

जिससे संविदा कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति ठीक हो सके लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है मजबूरन हमें ऑनलाइन रिपोर्टिंग ठप करने का फैसला लेना पड़ा है।

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