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Kartak

PanchTantra की कहानी-King-Pinglak भाग-13

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-12 में आपने पढ़ा कि …….. जब करटक ने भी हामी भर दी, दमनक उसे प्रणाम करके King-Pinglak की ओर चला। दमनक को अपनी ओर आते देख कर King-Pinglak ने द्वारपाल को आदेश दिया, मेरे पुराने मंत्री के पुत्र दमनक आ रहे हैं।…

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-12

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-11 में आपने पढ़ा कि …….. राजा (King)का पद उसी तरह दुर्लभ है जैसे ब्रह्मतेज की प्राप्ति। ब्रह्मत्व की साधना और राजसत्ता की प्रितस्पर्धा में तनिक भी चूक होने पर सब कुछ गड़बड़ हो जाता है। और इनमें एक और समानता…

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-11

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-10 में आपने पढ़ा कि …….. पिता के संपर्क में रह कर जो कुछ मैंने सीखा है उसका एक भेद यही है कि जो बिना अवसर के ही कोई बात कह बैठता है वह यदि बृहस्पति की तरह परम विद्वान हो तो भी उसका अपमान होकर ही रहता है। अब…

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-10

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-9 में आपने पढ़ा कि …….. दमनक समझाता जा रहा था, जो व्यक्ति राजा को आफत में पड़ा देखकर भी उसकी अनसुनी नहीं करता है और उसके हुक्म पहले की तरह बिना किसी चूक और हीला-हवाली के बजाता रहता है, वही राजा का चहेता हो…

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-9

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-8 में आपने पढ़ा कि …….. दमनक ने अब हंसते हुए कहा, एक बात याद रखो। जो सेवक सोचता है कि राजा (King) को रिझा लिया, अब किसी की चिंता नहीं, वह कभी भी धोखा खा सकता है। राजा (King) की मां, उसकी पत्नी, उसके पुत्र,…

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-7

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-6 में आपने पढ़ा कि —........ करटक एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखने वालों में था। वह किसी काम में जल्दी नहीं करता था और पूरी बात समझे बिना कुछ करने को तैयार ही नहीं होता था। बोला, तुमने यह कैसे जान लिया कि इस समय वह…

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-6

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-5 में आपने पढ़ा कि — मैं थोड़ी देर के लिए तुम्हारी बात मान भी लेता हूं। पर क्या यह सच नहीं है कि जो लोग ठान लेते हैं और इसी पर जुट जाते हैं वे सांपों, हाथियों और शेरों को भी वश में कर लेते हैं? तो क्या ऐसा…

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-4

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-3 में आपने पढ़ा कि —..... मित्र, अपना पेट तो सभी भर लेते हैं पर दुनिया का भला करने वाले सज्जन बहुत कम होते हैं। ऐसे लोगों का जीवन जेठ की तपन से झुलसते हुए संसार के संताप को हरने के लिए उमड़ पडऩे वाले मेघ के…

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-3

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-2 में आपने पढ़ा कि .............. कल को यही मौका पडऩे पर इस भेद को खोल कर उसका अहित कर सकता है। अब उसने अपनी बात पर पर्दा डालने के लिए कहा, यार-जीना उसी का जीना है जिसके जीने से बहुतों को जिंदगी मिले। अपना पेट…

PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-5

पिछले अंक, PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-4 में आपने पढ़ा कि………. एक तरह से साथ के व्यापारी सही भी थे। बैल को बचाने के लिए आदमियों का जान चली जाए तो यह भावुकता महंगी पड़ेगी। जान और माल (Goods) तो वर्धमान का भी खतरे में था। वर्धमान की समझ…

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