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अब पंजाब का किसान नहीं रहा नंबर वन! इन मामलों में UP और MP ने पछाड़ा

पंजाब के हजारों किसान फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की मांग को लेकर दिल्ली चलो का नारा दे रहे हैं। फसलों पर एमएसपी तो मिल रही है लेकिन पंजाब का किसान अब पैदावार में पिछड़ता जा रहा है।

इस बार प्रदर्शन में सबसे ज्यादा पंजाब के किसान शामिल हैं लेकिन पंजाब में गेहूं व धान पर एमएसपी है। इसकी खरीद तमाम सरकारी एजेंसियां करती हैं।

फिर भी पंजाब का किसान यूपी व बंगाल से पीछे हो रहा है। अन्नदाता की शोर के बीच तथ्य यह है कि पंजाब न तो भारत का सबसे अग्रणी गेहूं उत्पादक राज्य है और न ही चावल में। हालात यह है कि अंडे, दूध और फल सब्जी के उत्पादन में भी पंजाब पीछे रह गया है।

1970 के दशक में हरित क्रांति शुरू होने के बाद से ही पंजाब को भारत का भूख मिटाने वाले राज्य के रूप में सम्मान दिया जाता रहा है। हरित क्रांति के बाद से पंजाब गेहूं उत्पादक में नंबर वन रहा है लेकिन आज पंजाब गेहूं उत्पादन में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है।

आज पंजाब में भारत के कुल गेहूं का 12 प्रतिशत उपज होता है। पिछले साल पंजाब में 14.8 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हुआ और भारत में कुल मिलाकर 114 मिलियन टन का उत्पादन हुआ।

पंजाब ने 1970 के दशक में भारत को चावल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का नेतृत्व किया लेकिन गेहूं की तरह धान की पैदावार में भी पंजाब अब नंबर वन राज्य नहीं है।

अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के कुल उत्पादन में इसका हिस्सा 10 फीसदी से भी कम है। भारत 135 मिलियन टन का उत्पादन करता है जबकि पंजाब 11.82 मिलियन टन है, जो 10 फीसदी से की कम है।

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