एनालिसिस

बकवास है, मत जाईये Newton देखने

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आश्चर्य है कि कैसे Newton को Oscar के लिये नामित कर दिया गया। जो भी फिल्म भारत की विरुपित छवि पश्चिम के सामने पेश करे वहां पुरस्कार के लिये नामित हो जाती है। यह कोई नया माईन्ड सेट नहीं है। और काईयां फिल्म मेकर इस प्रवृत्ति का पूरी मक्कारी के साथ बेजा फायदा उठाते हैं।

Newton भारत में निर्वाचन प्रक्रिया का माखौल उड़ाती है। अतिरंजित दृश्य दिखाती है। नक्सली क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा बन्दूकों के साये में मतदाताओं को जबरदस्ती वोट दिलवाने का दृश्य फिल्माया गया है। जो भारत निर्वाचन आयोग के ईमानदार प्रयासों का माखौल उड़ाता है।

जो सच है वह तो फिल्म दिखाती नहीं, बल्कि अपने तरीके से तोड़ी मरोड़ी सच्चाई दिखाती है।
निर्वाचन प्रक्रिया से दशकों से जुड़े होने के कारण जहां तक मेरी जानकारी है कहीं भी सुरक्षा बल मतदाताओं से जबरदस्ती वोट नहीं दिलवाते, जैसा फिल्म दिखाती है। हां, मतदान टोली पर नक्सलाइट हमले होते हैं, मतदान कार्मिक मरते भी हैं। मगर यह यथार्थ तो फिल्म से गायब है।

दो स्टार से अधिक की फिल्म नहीं है। बकवास है। मत जाईये देखने। बाक्स आफिस पर भी पिट गई है।

यह उन छद्म बुद्धिजीवियों को जरुर रुचेगी जिन्हें भारत में बुराईयों को देखने का चस्का है और नक्सलाइट क्षेत्रों में निर्वाचन वाकई कैसे सम्पन्न होता है की जरा भी जानकारी नही है।

 

डाॅ. अरविन्द मिश्र की फेसबुक वाॅल से…

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