जब मोइली जी को लगा कि अब उनकी बारी है तो उन्होंने थोड़ा सा राज खोल दिया, उसके बाद दिल्ली दरबार उन्हें मनाने में जुट गया और फिर बड़ी डील हुआ और उन्हें महाकाव्य लिखने को कह दिया गया। इस महाकाव्य में पहले जो सब बोलते थे, उसे लिखना भूल गये, मगर यहां की जनता इस काले कारनामे को भूलने वाली नहीं है।

उन्होंने कहा कि सालों तक ठेकों का कैसा-कैसा खेल चला, नोटबंदी के समय कांग्रेस के नेताओं, मंत्रियों के घरों से बेनामी संपत्ति भी मिली। हाल ही में ठेकेदारों के घऱों पर छापेमारी हुई, उसमें क्या-क्या निकला, यह आपने देखा है।

ये बेनामी संपत्ति, कालाधन, ये लूट के गहने, जेवरात यह किसके थे। यह यहां के किसानों के हक के थे, यहां के लोगों के हक के थे, जिन्हें घर मिलना था, यहां के लोगों के थे, जो भूखे रह रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.