इतना ही नहीं कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने भी कांग्रेस के वोट कम करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए यह भी कहा जाने लगा है कि गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान इस प्रकार की बयानबाजी ने ही कांग्रेस को कमजोर किया।
अगर ऐसा नहीं होता, तो हो सकता था कि गुजरात में कांग्रेस और ज्यादा अच्छी स्थिति में होती। दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम की समीक्षा की जाए तो यह स्वाभाविक रुप से दिखाई देता है कि कांग्रेस अपनी ओर से किसी प्रकार का प्रभाव नहीं छोड़ पाई है।
दूसरी तरफ कांग्रेस के नए नवेले राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के खाते में यह दो असफलताएं और जुड़ गर्इं। गुजरात में कांग्रेस की अच्छी स्थिति की दुहाई देकर भले ही कांग्रेस अपना बचाव करे, लेकिन लोकतंत्र में सीटों की संख्या और बहुमत का ही खेल होता है, जो आज कांग्रेस के पास नहीं है।
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