इसलिए यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस अपाहिज जैसी अवस्था को प्राप्त करने की ओर अग्रसर हो रही है। आगे कांग्रेस की अवस्था क्या होगी, इसका अनुमान उसके अध्यक्ष स्वंय लगायें तो ज्यादा बेहतर है। जबकि बाहरी राजनीतिक जगत और अंदरखाने में कांग्रेस की इतिश्री की अवस्था को प्राप्त करने जैसी खबरें भी सुनाई देने लगी हैं।
गुजरात चुनाव में नरेन्द्र मोदी और राहुल
अभी हाल ही में वरिष्ठ राजनीतिज्ञ अमर सिंह ने कहा भी है कि नरेन्द्र मोदी न तो कभी हारे हैं और न ही हारेंगे। उनका आशय संभवत: यही निकाला जा सकता है कि कांग्रेस में अब उतनी ताकत नहीं है कि वह भाजपा को पराजित कर सके। इसी प्रकार कांग्रेस में तो चुनाव से पूर्व ही निराशा के स्वर प्रस्फुटित हो चुके हैं।
गुजरात के चुनाव परिणामों ने भाजपा को गहरे सबक से साक्षात्कार कराया है। गुजरात की जनता ने भाजपा को अभी भय से केवलमात्र सामना कराया है। वह भी एक ऐसा भय जो आगामी चुनावों के लिए भाजपा को आत्म मंथन के लिए विवश करता रहेगा, जबतक कि 2019 के लोकसभा के चुनाव सम्पन्न नहीं हो जाते।