गुजरात और हिमाचल में चुनावों के जो परिणाम आए हैं, उससे भारतीय जनता पार्टी को सत्ता तो मिल गई। इन चुनाव परिणामों में खास बात यह रही कि गुजरात में सत्ता विरोधी लहर बिलकुल भी दिखाई नहीं दी, इसके अलावा हिमाचल में सत्ता विरोधी लहर के चलते कांग्रेस को सत्ता छोड़नी पड़ी है।
इससे यह साफ हो जाता है कि दोनों राज्यों में भाजपा की ही लहर दिखाई दी। गुजरात के चुनाव परिणाम का अध्ययन करने से यह प्रमाणित होता है कि वहां वास्तव में कांग्रेस के नाम पर कोई जादू नहीं था। केवल पटेल लोगों का ही खेल था। जिससे अन्य वर्ग के लोग भी खफा थे। क्योंकि वे भी देख रहे हैं कि आरक्षण के नाम पर देश में क्या हो रहा है। इसलिए मात्र आरक्षण देने के लिए ही देश को बन्धक बना दिया जाये, कतई उचित नहीं।
कांग्रेस को जो भी सफलता मिली है, उसमें उन तीन नए नेताओं का व्यापक प्रभाव दिखाई देता है, जिन्होंने कांग्रेस का साथ, अपने मतलब के लिए दिया। अब विचार करना पड़ेगा कि यदि इन तीन नेताओं का साथ कांग्रेस को नहीं मिला होता, तो कांग्रेस की स्वभाविक स्थिति क्या होती?
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