Panchtantra-Kartak

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-4

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-3 में आपने पढ़ा कि —..... मित्र, अपना पेट तो सभी भर लेते हैं पर दुनिया का भला करने वाले सज्जन बहुत कम होते हैं। ऐसे लोगों...
PANCHATANTRA-DAMANAK

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-3

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-2 में आपने पढ़ा कि .............. कल को यही मौका पडऩे पर इस भेद को खोल कर उसका अहित कर सकता है। अब उसने अपनी बात पर...
PANCHATANTRA-KING

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-2

पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-1 में आपने पढ़ा कि .......... फिर उस क्रोध आया, और यह याद आया कि इसके बाप ने इसके भविष्य के बारे में ज्योतिषियों से सलाह करके...
panchatantra-monkeys

PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-1

किसी नगर के पास एक छोटी सी वनस्थली थी। एक बनिये ने उसमें एक मंदिर बनवाना आरंभ किया। वनस्थली नगर के पास ही था इसलिए वहां काम करने वाले कारीगर और...
panchatantra-संजीवक

PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-5

पिछले अंक, PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-4 में आपने पढ़ा कि………. एक तरह से साथ के व्यापारी सही भी थे। बैल को बचाने के लिए आदमियों का जान चली जाए तो यह भावुकता...
Panchtantra-taktaka-4

PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-4

पिछले अंक, PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-3 में आपने पढ़ा कि………. देसावरी व्यापारी (Businessmen) तो परदेश में जा कर अपने माल (Goods) को दूने-तीगुने दाम पर बेचता है और वहां का माल (Goods)...
Panchtantra-Taktaka-3

PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-3

पिछले अंक, PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-2 में आपने पढ़ा कि………. व्यापार (Business) में गंधी का काम तो सोने चांदी के व्यापार (Business) से भी शानदार है। इसमें एक रुपए का तेल फुलेल बना...
Panchtantra-Taktaka-2

PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-2

पिछले अंक  PanchTantra-Taka Nahin To Taktaka भाग-1 में आपने पढ़ा कि………. ब्याज उगाही का काम है तो अच्छा पर एक बार पैसा दूसरे के पास गया तो डर यह भी रहता है...
Taktaka

PanchTantra-टका नहीं तो टकटका भाग-1

पिछले अंक, PanchTantra-टका नहीं तो टकटका में आपने पढ़ा कि.......... धन दौलत के खूब बढ़ जाने के बाद आदमी के जो काम जहां हैं वहीं उसी तरह सधते चले जाते हैं। जैसे...
Taka-Nahin-To-Taktaka

PanchTantra-टका नहीं तो टकटका

महिलारोप्य नामक जिस नगर में अमरशक्ति नाम का राजा राज करता था और जिसमें विष्णुशर्मा अपनी पाठशाला चलाते थे वह वह महिलारोप्य नामक नगर से उतना ही दूर था जितना दिल्ली,दिल्ली...

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