जबकि वे जानते थे कि एक तरफ उस दिन गणतंत्र दिवस के आयोजनों और इनमें शामिल होने वाले विदेशी मेहमानों की सुरक्षा में हमारे सुरक्षा बल लगे होंगे तो दूसरी तरफ इन हालातों में देश में आतंकवादी घटनाओं को टालने के लिए भी देश का पूरा फोर्स रेड अलर्ट पर होगा।
ऐसे मौकों पर देश की सुरक्षा वैसे ही हमारे सुरक्षा बलों के लिए एक चुनौती होती है। लेकिन इन सभी महत्वपूर्ण बातों को नजरअंदाज करके देश के नागरिकों की सुरक्षा को ताक पर रख कर सिर्फ़ अपने आर्थिक लाभ को ध्यान में रखते हुए भारी विरोध के बावजूद अपनी विवादित फिल्म गणतंत्र दिवस पर अपने स्वार्थ को सर्वोपरि रखते हुए प्रदर्शित करना ही अपने आप में कई सवालों को खड़ा करता है।
क्योंकि यह तो अपेक्षित ही था कि फिल्म का विरोध होगा और हुआ भी। लेकिन अगर इस अराजकता का फायदा आतंकवादी संगठन उठा लेते और भीड़ में घुसकर किसी बड़ी आतंकवादी घटना को अंजाम दे देते तो? लेकिन जो हुआ वो भी देश को शर्मिंदा करने वाला था।
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