कांग्रेस सहित सात राजनीतिक दलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ दाखिल Impeachment प्रस्ताव में जो आरोप हैं, उनकी सत्यता जांच का विषय हो सकती है, लेकिन अब वे आरोप-प्रत्यारोप के घेरे में जरूर आ गए हैं।
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अब जब उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस Impeachment प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, भविष्य में भी चाहे-अनचाहे इन पर बहस होती रहेगी। वेंकैया नायडू को Impeachment प्रस्ताव का गहनता से अध्ययन करने के पश्चात ही इस पर अपना निर्णय सुनाने के बजाय इसे कमेटी को सौंपना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट की सर्वोच्चता पर कोई भी प्रश्नचिन्ह नहीं होना चाहिए? हमारे लोकतन्त्र में ये तो होना ही चाहिए कि किसी भी अंग की सर्वोच्चता ना बनी रहे। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश सभी के ऊपर कोई ना कोई व्यवस्था होनी ही चाहिए।