वर्ष 2015 में एक महिला जज ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज ए.के. गांगुली के खिलाफ यौन उत्पीड़ऩ का आरोप लगाया था। इसी आरोप को आधार बनाते हुए जस्टिस गांगुली के खिलाफ राज्यसभा में Impeachment का प्रस्ताव दिया था।
जब Impeachment के आधार पर संसदीय समिति ने जांच कमेटी गठित की तो इस्तीफा देने के बजाय जस्टिस गांगुली ने जांच का सामना करने का फैसला लिया। दो साल तक जांच चली, लेकिन एक भी आरोप साबित नहीं हो सका। इस तरह Impeachment प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया गया।
इन सबको देखते हुए अब आम आदमी के मन में यह बैठता जा रहा है कि न्याय किस चिड़िया का नाम है, दिखाई देना मुश्किल है। न्याय के क्या मायने हैं, इसका भी अर्थ कोई नहीं बता सकता। जिसके पास सत्ता है, वो चाहे जो करे, कुछ भी गलत नहीं है।
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