जनवरी, 2010 में गठित जांच समिति के एक आदेश को उन्होंने उच्चतम न्यायालय में चुनौती भी दी। इस बीच वे 2010 में सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिये गये। बावजूद इसके महाभियोग की कार्रवाई नहीं रुकी तो 29 जुलाई, 2011 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश सी.वी. नागार्जुन रेड्डी और गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश जे.बी. पार्दीवाला के खिलाफ भी महाभियोग की कार्यवाही के लिए राज्यसभा में प्रतिवेदन दिए गए।
न्यायमूर्ति पार्दीवाला के खिलाफ तो उनके 18 दिसंबर, 2015 के एक फैसले में आरक्षण के संदर्भ में की गई टिप्पणियों को लेकर यह प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन मामले के तूल पकड़ते ही न्यायमूर्ति पार्दीवाला ने 19 दिसंबर को इन टिप्पणियों को फैसले से निकाल दिया था।
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