राजनीतिक दलों के आचरण से भी यह नहीं लगता कि वे सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि जाने-अनजाने अपनी चाहतों के कारण ही जजों ने अपने को पार्टियों के प्रति प्रतिबद्ध कर लिया दिखाई देता है।
आने वाले दिनों में सवा सौ साल से ज्यादा पुरानी राजनीतिक पार्टी का अगला कदम इस बहस को बढ़ाएगा और इस विशाल संस्था की नींव को हिलाकर रख देगा। अगर आरोप लग रहे हैं तो जिस पर आरोप लग रहे हैं, उसका भी फर्ज बनता है कि उसकी जांच के लिए वह भी अपने को स्वंय से प्रस्तुत करे।
बेहतर तो यह होता कि Impeachment का प्रस्ताव संसद में लाये जाने से पूर्व और चार जजों के उनके विरूद्ध् उठी आवाज के बाद से ही मुख्य न्यायाधीष को अपने को पाक-साफ सिद्ध करने की पहल करनी चाहिए थी।
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