इधर छह बैंकों की कंसोर्टियम बनाकर कोठारी ग्रुप को लोन देने के मामले में स्थानीय बैंक अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है और हेड आफिस से मामला डील होने की बात की। इस कंसोर्टियम में बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और यूनियन बैंक शामिल हैं।
मामले में कोठारी ग्रुप के वकील शरद बिरला का कहना है कि विक्रम कोठारी कहीं फरार नहीं थे। वह कानपुर में थे और बैंको से लगातार संपर्क में थे। इस संबंध में 20 फरवरी को बैंको के साथ उनकी मीटिंग थी।
इसके पहले ही कार्रवाई हो गई। इस संबंध में विक्रम कोठारी का कहना है कि उनके ऊपर भागने के आरोप लगाए जा रहे हैं जो कि गलत है वह कहीं नहीं गए उन का मामला एनसीएलटी में विचाराधीन है और वह ऋणों के सेटलमेंट के लिए बैंकों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
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