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Write Off नहीं किए पूंजीपतियों के Loan : जेटली

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NIS Digital Team का कहना है कि—सरकार का काम इन बैंकों को चम्मच से दूध पिलाने का नहीं है। आखिरकार सरकार बैंक चलाने, कार्पोरेशन चलाने आदि में इतना इंटरेस्ट क्यों लेती है। उसका काम एडमिनिस्ट्रेशन का है। वो तो उससे ठीक से होता नहीं। वो तो बिजली बिल की वसूली और बैंकों के एनपीए को फण्डिंग करने पर तुली है।

एनपीए वाले बैंकों का पूंजी आधार बढ़ाने का सीधा मतलब है कि एक सरकार Loan दिलाकर बड़े पूंजीपतियों को लाभान्वित कर रही है और दूसरी सरकार ऐसे उद्योगपतियों से Loan ना चुकवाकर उन पैसों की भरपाई बैंकों को कर रही है।

अरूण जेटली ने कहा कि इसके तहत आगामी दो वित्त वर्षो में बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डाली जाएगी। जो बैंक एनपीए के चलते कमजोर पड़ गए थे, सरकार उन्हें पूंजीकरण के जरिये मजबूत करेगी ताकि वे बाजार से भी पूंजी जुटा सकें।

NIS Digital Team का कहना है कि—इतनी भारी-भरकम पूंजी, आखिरकार किसकी है, जिसे सरकार मनमाने ढ़ंग से, इन बैंकों के एनपीए को ढ़कने के लिए इस्तेमाल करने जा रही है। क्यों इतनी भारी-भरकम राशि उन बैंकों को दी जायेगी जो एनपीए जैसा अपराध करके बैठी हैं।

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