वित्त मंत्री ने कहा कि 2015 में जब बैंकों की बैलेंस शीट खंगालकर Loan की समीक्षा की गई तो उससे बड़ी मात्रा में फंसे Loan की जानकारी मिली। असेट क्वालिटी रिव्यू के जरिये 4,54,466 करोड़ रुपये के लोन का पता चला जो एनपीए श्रेणी का था लेकिन उसे छिपा कर रखा गया।
SBI, Mumbai
NIS Digital Team का कहना है कि—ऐसे Loans को जिन बैंकों ने छिपाकर रखा उनके चेयरमैन और मैनेजिंग डाइरेक्टर को दण्डित किया जाना चाहिए। जिस Loan को बैंकें नहीं वसूल पा रहीं हैं, उसके लिए उस पूरी कमेटी को दोषी मानते हुए इसकी रिकवरी उसी कमेटी के सदस्यों से की जानी चाहिए, जिन्होंने वो लोन पास किया था।
जेटली ने कहा कि सरकार ने किसी भी बड़े एनपीए का Loan माफ नहीं किया है। इसके बजाय सरकार ने डिफॉल्टरों से Loan वसूलने को इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड बनाया है और 12 बड़े डिफॉल्टरों से चरणबद्ध लोन वसूलने के लिए नेशनल कंपनी लॉ टिब्यूनल में मामले शुरू कराए हैं।
इन 12 डिफॉल्टरों पर 1.75 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं। जेटली ने कहा कि सरकार ने ऋण प्रवाह बढ़ाने तथा नौकरियों के सृजन को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पूंजी आधार बढ़ाने का निर्णय किया है।
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